स्थानीय समाचार

वाई यात्रा में जहाज उड़ने से पहले एयर होस्टेस सुरक्षा सूचनाएं देती है। कहा जाता है कि आपातकालीन परिस्थिति में, जब हवा का दबाव कम हो जाए तो ऑक्सीजन मास्क का प्रयोग करें। लेकिन एक बात विचित्र बताई जाती है कि पहले अपना मास्क पहनें, उसके बाद जरूरतमंद को पहनाएं। अक्सर सुना जाता है कि अपने से पहले दूसरों की सोचें, परंतु यहां पहले अपने को बचाने की बात की जाती है। जिसमें थोड़ा सा भी विवेक होगा, वह यह समझ जाएगा कि हम दूसरों की सहायता तभी कर सकते हैं, जब हम स्वयं सक्षम होंगे। जो खुद बीमार होगा, वह क्या किसी की सहायता करेगा? जो खुद कर्जे में हो, वह क्या किसी की आर्थिक मदद करेगा? जो स्वयं दुखों में फंसा हो, वह क्या किसी को खुशी देगा? जो स्वयं अज्ञान से ढका हो, वह क्या ज्ञान का दीया जलाएगा? सौ बातों की एक बात, पहले अपना उद्धार करो, फिर किसी और के उद्धार की सोचो। गीता के अध्याय 6 (श्लोक 5) में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं- उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत। आत्मैव ह्यात्मनो बंधुरात्मैव रिपुरात्मन:।। इसका भावार्थ है कि एक ही व्यक्ति आपका उद्धार कर सकता है, एक ही व्यक्ति आपको बर्बाद कर सकता है और वह हैं आप स्वयं। असल समस्या यह है कि हम सोचते हैं कि हम दूसरे को ठीक कर सकते हैं। हर कोई दूसरे को ठीक करना चाहता है, परंतु स्वयं को कोई ठीक नहीं करना चाहता। आप एक ही व्यक्ति का उद्धार कर सकते हैं, और वह आप स्वयं हैं। अब प्रश्न यह है कि अपना उद्धार कैसे करें? इसके लिए शास्त्र तीन योगों पर प्रकाश डालते हैं। पहला कर्मयोग, जिसमें मनुष्य अपने जीवन में श्रेष्ठ लक्ष्य बनाकर मन और बुद्धि को उस लक्ष्य से जोड़ देता है। दूसरा है भक्तियोग, जिसमें मन को प्रभु के चरणों में लगाकर हर कार्य को निमित्त भाव से करता है। तीसरा है ज्ञानयोग, जिसमें व्यक्ति अपने जीवन के अज्ञान रूपी अंधकार को हटाकर ज्ञान का दीपक जलाता है। यही है अपने उद्धार का सर्वोत्तम मार्ग! इसके बाद हम दूसरों का उद्धार कर सकते हैं।………more

राष्ट्रीय समाचार

ई-मेल आइडी न होने पर फिसड्डी माने जाएंगे झारखंड के अफसर
ठ्ठ प्रदीप सिंह, रांची व्यक्तिगत ई-मेल आइडी देने का झारखंड सरकार का नया फरमान अब सरकारी बाबुओं की गले की हड्डी बनने वाला है। अब वे यह भी बहाना नहीं बना सकते कि फलां सरकारी आदेश की प्रति उन्हें नहीं मिली। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के नए आदेश के तहत राज्य सरकार में कार्यरत झारखंड प्रशासनिक सेवा के तमाम अधिकारियों को अपनी व्यक्तिगत ई-मेल आइडी देना अनिवार्य होगा। अगर वे 15 दिनों के भीतर अपनी ई-मेल आइडी नहीं सौंपते हैं तो उनके खिलाफ सेवा पुस्तिका में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की जाएगी। यही नहीं, विभाग स्वत: उनके वार्षिक गोपनीय अभियुक्ति में यह दर्ज करेगा कि वे सूचना प्रौद्योगिकी के ज्ञान में फिसड्डी हैं। कार्मिक विभाग की यह कवायद राज्य सरकार की उस कोशिश का हिस्सा है जिसमें अक्सर हिदायत दी जाती है कि अद्यतन सूचना तकनीक को अपनाकर सारे विभाग अपने दैनिक कामकाज को ज्यादा से ज्यादा पारदर्शी बनाएं। अफसरों की ई-मेल आइडी होने से पलक झपकते ही राज्य सचिवालय से दूरदराज के हिस्सों तक सहज ही संदेश पहुंच जाएगा। इस कवायद में सबसे बड़ी मुश्किल कनेक्टिविटी की है। दूरदराज के इलाकों में आज भी ब्रांडबैंड समेत अन्य नेट सुविधा प्रदाता कंपनियों की सेवा उपलब्ध नहीं है। हालांकि मुंडा ने हाल ही में बीएसएनएल अधिकारियों के साथ बैठक में निर्देश दिया था कि तमाम क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाए। अगर इस दिशा में सफलता मिली तो राज्य सरकार की कवायद का असर दिखेगा। अर्जुन मुंडा हैं टेक्नो फ्रेंडली मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा खुद अद्यतन सूचना तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इलेक्ट्रानिक गजट के शौकीन मुंडा ने अपने पूर्व के कार्यकाल में तमाम जिलों को राज्य मुख्यालय से जोड़ने की पहल करते हुए झारनेट का गठन किया था। वह अक्सर जिला मुख्यालयों में मौजूद अफसरों से वीडियो कांफ्रेंसिंग से विकास योजनाओं की प्रगति का जायजा लेते हैं। मुंडा ने अधिकारियों को निर्देश दे रखा है कि सूचना प्रौद्योगिकी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर रोजमर्रा के कामकाज को सुगम और पारदर्शी बनाएं। इसके अलावा हर विभाग अपना डाटा बैंक बनाए ताकि योजनाओं की मॉनीटरिंग के साथ-साथ अफसरों के कामकाज की भी समीक्षा की जा सके।…………………..click here

राज्यकीय योजना

केंद्रीय प्रायोजित ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम

केन्द्र द्वारा वित्त पोषित ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के अन्तर्गत सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के अन्तर्गत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रो में गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को प्रोत्साहन स्वरूप आर्थिक सहायता उपलब्ध कराते हुए व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण किया जाता है। योजना का क्रियान्वयन वर्ष 1999-2000 में चार जनपदों से प्रारम्भ होकर वर्तमान में समस्त जनपदों में किया जा रहा है। अभियान का संचालन जनपद स्तर पर जिला पंचायत के नियन्त्रणाधीन जिला स्वच्छता समिति द्वारा किया जाता है। अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में प्रभावी जागरूकता कार्यक्र मों द्वारा सर्वप्रथम व्यक्तिगत शौचालयों की मांग का सृजन किया जाना है ताकि शौचालयों के निर्माण के उपरान्त उनका उपयोग हो तथा व्यक्तियों में स्वच्छ आदतें भी विकसित हों।

केंद्रीय प्रायोजित ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम

हैण्डपम्पों की मरम्मत डा0 अम्बेडकर ग्राम विकास योजना

बहुउद्देशिये पंचायत भवनों का निर्माण

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज योजना के अन्तर्गत निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों एवं कर्मियो का प्रशिक्षण

पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि

केंद्रीय योजना

कृषि भारत की कुल जनसंख्या के 58.4% से अधिक लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है। देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में भी कृषि का योगदान लगभग पांचवें हिस्से के बराबर है। कुल निर्यात का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा कृषि से प्राप्त होता है और यह अनेक उद्योगों के लिए कच्चा माल भी उपलब्ध कराता है। अस्थिर और कम विकास दर और देश के अनेक हिस्सों में कृषि संकट न केवल राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा है बल्कि राष्ट्र के रूप में आर्थिक विकास के लिए कृषि महत्वपूर्ण है।

इस खंड में सरकार की योजनाओं और नीतियों से जुड़े महत्वपूर्ण लिंक दिए गए हैं। इसके अलावा अनेक ऐसी चीजें दी गई हैं जो कृषक समुदायों और कृषि पर निर्भर अन्य लोगों के लिए लाभकारी होंगी।

फसल विकास योजनाएं

  • गेहूं की फसल पर आधारित समेकित अनाज विकास कार्यक्रम
  • चावल की फसल पर आधारित समन्वित अनाज विकास कार्यक्रम
  • मोटे अनाजों पर आधारित समेकित विकास कार्यक्रम, क्षेत्र के आधार
  • गन्ना फसल के सतत विकास के लिए, फसल आधारित प्रणाली
  • जूट के लिए विशेष विकास कार्यक्रम को नौंवी योजना के दौरान लागू किया गया था। इसके बाद अक्टूबर 2000 में कृषि को आर्थिक मंच में शामिल कर लिया गया, जिससे राज्य सरकारों को काफी सुविधा प्राप्त हुई। इन कार्यक्रमों को लागू करने के लिए राज्यों को उनकी जरूरतों के हिसाब से सहायता भी दी गई।

http://bharat.gov.in/sectors/agriculture/index.php

संसाधन

प्रकतिक संसाधन
ग्राम पंचायत में सभी गाँव मे कुल मिलाकर 04 पोखर  है जिनसे गाँव वालों का काम होता है इन पोखरों, नहर से खेतों की सिचाई, गाँव के जानवरों को पीने का पानी एवं गाँव के बच्चे इन पोखरों / नहर में नहाते है गाँव की महिलाएँ कपड़े आदि भी धोती है गर्मी के समय इन पोखरों / नहर से गाँव वालों को पानी की ज़्यादा समस्या नही होती है और इनका काम होता रहता है! गाँव पंचायत में कुएँ भी है!

व्यक्तिगत संसाधन
ग्राम पंचायत में कुल हॅंडपंप लगे हुए है जो की गाँव के लोगों ने अपनी सुविधा के अनुसार अपने-अपने घरों में लगा रख्खे है और कुछ हॅंडपंप ग्राम पंचायत ने सार्वजनिक लगाएँ है ताकि रह चलने वालों को पानी की समस्या न हो!

मानव संसाधन
ग्राम पंचायत के सभी गाँवों को मिलाकर करीब पंचायत में 80 प्रतिशत मजदूर, 20 प्रतिशत नौकरी एवं व्यापारी लोग रहते है किसान अपनी खेती करते है मजदूर खेतों एवं फॅक्टरी, दुकानों में मजदूरी, कुछ सरकारी-कुछ प्राइवेट नौकरी करते है और अपना एवं अपने परिवार का पालन पोषण करते है!

सांस्कृतिक संसाधन
ग्राम पंचायत में सांस्कृतिक भवन नही है पर यदि गाँव में कोई कार्यक्रम जैसे- शादी, होली, दीपावली, ईद, बकरीद आदि कार्यक्रम गाँव वाले मिल कर कराते है उसके लिए सांस्कृतिक भवन / सरकारी स्कूल के भवन आदि ले लेते है और कार्यक्रम समाप्त होने के पश्चात उसकी साफ-सफाई भी करते है!

यातायात के साधन
ग्राम पंचायत रोड से ज्यादा दूर नही है अतः किसी भी जगह से आने जाने के लिए बस और प्राइवेट साधन उपलब्ध हैं, परंतु सड़क से ग्राम पंचायत तक जाने के लिए पैदल या अपनी सवारी से यात्रा करनी पड़ती है पर कुछ ही दूर के लिए| यहाँ से कुछ ही दूरी पर रेलवे स्टेशन है!

सुभिधाएँ

स्वास्थ सुविधा
ग्राम पंचायत में एक स्वास्थ केंद्र है जिसमें एक एम. बी. बी. एस. डॉक्टर, एक समान्य डॉक्टर, एक नर्स, एक ए. एन. एम. बैठिति है एवं गाँव वालों का इलाज करते है स्वास्थ केंद्र होने की वजह से गाँव वालों को समान्य बीमारी के लिए शहर नही जाना पड़ता है उसका इलाज यहीं हो जाता है!

कृषि सुविधा
गाँव वालों के पास खेती करने के लिए पर्याप्त खेती है जिसमें वे लोग अपनी सुविधा के अनुसार फसल लगाते है खेतों में धान, गेंहूँ, मक्का, बाजरा, जौ, मटर, चना, दाल, गन्ना, एवं सब्जी आदि की खेती करते है और कुछ लोगों के बाग भी है जिसमें आम, अमरूद, जामुन आदि के पेड़ लगे है!

संचार सुविधा
पंचायत में लगभग 05% बेसिक टेलिफोन फोन है जो की भारत संचार निगम लिमिटेड के है और 85% लोगों के पास मोबाइल फोन है, और गाँवों में पी. सी. ओ. भी है|

बिजली सुविधा
इस पंचायत में लाइट की ज़्यादा समस्या नही है गाँव में लगभग 10 से 14 घंटे लाइट आती है जिसे गाँव वालों को कोई समस्या नही होती है पर लाइट का समय सही न होने के कारण कभी-कभी समस्या उत्पन्न हो जाती है!

रोज़गार सुविधा
फैक्टरी : इस ग्राम पंचायत के आस पास औधोगिक क्षेत्र नही है इस लिए यहाँ पर फैक्टरी कम या ना के बराबर है इस लिए लोगों के पास रोजगार कम है जिसके लिए उन्हे गाँव बाहर जाना पड़ता है |

गाँव में : गाँव में कृषि, पशुपालन, डेरी, सब्जी आदि का व्यपार होता है| मुस्लिम लोग मुर्गी पालन करते है, करीब गाँव में सभी प्रकार की फसलों की पैदा वार होती है|

बैंक:- इस पंचायत में तो कोई बॅंक नही है पर ब्लॉक में बॅंक ऑफ बड़ौदा है जिसमें गाँव के लोगों के खाते खुले है|

पंचायत

ग्राम पंचायत चन्दीपुर

ब्लॉक : भिटौरा
पोस्ट : भिटौरा
थाना : हुसेंगंज
जिला : फतेहपुर
पंचायत में कुल वार्डों की संख्या : 11


ग्राम प्रधानम : श्रीमती गमला देवी पत्नी श्री राजकुमार
उम्र : 40
कार्य : ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले समस्त गाँव के विकास कार्य को देखना एवं उन गाँव का समुचित विकास करना.
सचिव : श्री गौरी शंकर
पंचायत सदस्य :- 11

नाम पिता/पति/माता उम्र फोन/मोबाइल पता कार्य फोटो

पंचायत का क्षेत्रफल: 4 वर्ग कि० मी० लगभग
पंचायत की कुल जनसंख्या: 2500 लगभग (पुरुष-60% महिला-30% बुजुर्ग-5% बच्चे-5%)
जनसंख्या घनत्व : 750 व्यक्ति / वर्ग कि०मी० लगभग
साक्षरता : 75% लगभग

इतिहास

चन्दीपुर ग्राम पंचायत, में इस बार महिला प्रधान है यह प्रधान पढ़ी लिखी नही है यह फतेहपुर शहर से 20/25 किलोंमिटर की दूरी पर है यहाँ पर आने जाने के लिए संम्पर्क मार्ग बना हुआ है! पर यहाँ पर प्राइवेट साधन है और लोग अपने साधन से आते जाते है इस ग्राम पंचायत में तीन गाँव आते है जिसमे चन्दीपुर ग्राम पंचायत भी सम्मलित है अन्य दो गाँव महेशपुर, गोपालपुर, आते है ये सभी गाँव छोटे-छोटे है यहाँ सभी लोग साधारण तौर-तरीके से ही रहते है! यहाँ के घर तो पक्के एवम् कच्चे बने है! पर उनका रहन-सहन साधारण ही है| लगभग सभी के पास (गाय, भैंस, बकरी, बैल) आदि जानवर भी है| जिनसे कृषि का कार्य किया जाता है| इस पंचायत में पीने के लिए पानी की व्यवस्था अच्छी है जानवरों के लिए तालाब बने हुए है जिनमें गाँव के जानवर पानी पीते है एवं गाँव के बच्चे यहाँ पर नहाते भी है गर्मियों के मौसम में ये तालाब लोगों को काफ़ी राहत देते है|

चन्दीपुर:- यह गाँव फतेहपुर शहर से 20/25 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है और यहाँ के लोग भी साधारण तौर-तरीके से रहते है एवं अपनी दिनचर्या के अनुसार कार्य करते है इस गाँव में पर्याप्त खेती है जिस में गाँव के लोग खेती करते है और अपना भारण पोषण करते है गाँव के कुछ लोग बाहर जा कर नौकरी भी करते है|

महेशपुर:- यह गाँव चन्दीपुर गाँव से 1 कि0 मी0 की दूरी पर स्थित है और यहाँ के लोग भी साधारण तौर-तरीके से रहते है एवं अपनी दिनचर्या के अनुसार कार्य करते है इस गाँव में पर्याप्त खेती है जिस में गाँव के लोग खेती करते है और अपना भारण पोषण करते है गाँव के कुछ लोग बाहर जा कर नौकरी भी करते है|

गोपलापुर:- यह भी चन्दीपुर गाँव से 1.5 कि० मी० की दूरी पर बसा हुआ एक छोटा सा गाँव है इस गाँव में पंचायत प्रधान का घर भी बना हुआ है पंचायत प्रधान महिला है और यहाँ के लोग भी साधारण तौर-तरीके से रहते है एवं अपनी दिनचर्या के अनुसार कार्य करते है इस गाँव में पर्याप्त खेती है जिस में गाँव के लोग खेती करते है और अपना भारण पोषण करते है गाँव के कुछ लोग बाहर जा कर नौकरी भी करते है|